गुणकारी और विश्व स्तरीय गन्ना उत्पादन के लिए तत्पर

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कृषि विज्ञान केन्द्र

परिचय

कृषि विज्ञान केन्द्र की स्थापना कृषि एवं संबंधित विषयों की नवीनतम तकनीकों के हस्तानांतरण एवं प्रसार द्वारा जनपद के सर्वांगीण विकास हेतु की गई। यह केन्द्र, 25 अक्टूबर 1999 को भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा हस्तांतरित किया गया। कृषि विज्ञान केन्द्र चारबाग स्टेशन से लगभग 5 किमी. दूरी पर रायबरेली-लखनऊ मार्ग पर स्थित है।

कृषि विज्ञान केन्द्र अपनी स्थापना से लेकर अभी तक लखनऊ जनपद के कृषकों की सेवा में तत्पर हैं। केन्द्र के समस्त तकनीकी हस्तांतरण कार्यक्रम “करके सीखों” एवं “देखकर विश्वास करो” के सिद्धांत पर संचालित किया जाता हैं तथा प्रौद्योगिकी में निहित वास्तविक दक्षता को सीखने पर बल दिया जाता है। यह केन्द्र एक ऐसी महत्वाकांक्षी वैज्ञानिक संस्था है जहाँ किसानों एवं कृषि कार्य में संलग्न महिलाओं एवं ग्रामीण युवकों/युवतियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण मुख्यत: फसलोत्पादन, पौध सुरक्षा, गृह विज्ञान, पशुपालन, उद्यानिकी, कृषि अभियान्त्रिकी, तथा अनेक कृषि संबंधित विषयों में दिया जाता है। संस्था द्वारा किसानों के ही खेतों पर किसानों को शामिल करते हुए वैज्ञानिकों की देख-रेख में उन्नत तकनीकी का परीक्षण किया जाता है तथा कृषकों एवं विस्तार कार्यकर्ताओं के समक्ष आधुनिकतम वैज्ञानिक तकनीक का अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन किया जाता है। कृषि विज्ञान केन्द्र वैज्ञानिकों, विषय वस्तु विशेषज्ञों, विस्तार कार्यकर्ताओं तथा कृषकों की संयुक्त सहभागिता से कार्य करता है। इस केन्द्र में प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण हाल, पुस्तकालय, आदि सुविधाओं के साथ फसलों, सब्जियों एवं चारा की उन्नतशील तकनीकी का प्रदर्शन तकनीकी पार्क में किया गया है। इसके अतिरिक्त किसानों हेतु वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन, मौनपालन, मशरूम उत्पादन पशु चाकलेट व पोषक वाटिका प्रदर्शन इकाई स्थापित है।

अधिदेश

तकनीक/उत्पादो का मूल्यांकन, शुद्धिकरण एवं प्रदर्शन।

उद्देश्य

कृषि विज्ञान केन्द्र का प्रमुख उद्देश्य स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों एवं नई विकसित कृषि तकनीक का समुचित उपयोग करके किसान की प्रति इकाई आय बढ़ाना और सामाजिक एवं आर्थिक रूप से ग्रामीणों को मजबूती प्रदान करना है, जिससे क्षेत्र की सर्वांगीण प्रगति हो सके।

तकनीकी हस्तक्षेप

  • गेहूँ की उन्नतशील प्रजातियों एवं तकनीकों का कृषक प्रक्षेत्र पर प्रदर्शन।
  • धान की उन्नतशील तथा रोगरोधी प्रजातियों एवं तकनीकों का कृषक प्रक्षेत्र पर प्रदर्शन।
  • दलहनी फसलों की उत्पादकता तथा मृदा की उर्वरता को बढ़ाने हेतु उन्नतशील तथा रोगरोधी प्रजातियों का कृषक प्रक्षेत्र पर प्रदर्शन।
  • गन्ना उत्पादन पर आधारित तकनीक का निकटवर्ती जनपदों में प्रवेशन, मूल्याँकन एवं प्रदर्शन।
  • जीरो टिलेज तकनीक से गेहूँ की बुवाई का कृषक प्रक्षेत्र पर प्रदर्शन।
  • आलू की सीड प्लाट तकनीक, उन्नतशील पछेती झुलसा रोग प्रतिरोधी प्रसंस्करण युक्त प्रजातियों का कृषक प्रक्षेत्र पर अनुकरणीय परीक्षण, प्रदर्शन एवं बीज उत्पादन।
  • नकदी फसल के रूप में सब्जी मटर, भिण्डी, कददूवर्गीय सब्जियाँ एवं मेथा की उन्नतशील प्रजातियों का कृषक प्रक्षेत्र पर प्रदर्शन।
  • सब्जियों की संरक्षित खेती का कृषक प्रक्षेत्र पर प्रदर्शन।
  • केला एवं आम में अंत:फसली को लोकप्रिय बनाना।
  • आम की उत्पादकता बढ़ाने हेतु जीर्णोंधार, सूक्ष्म पोषक तत्व एवं एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन का कृषक प्रक्षेत्र पर प्रदर्शन।
  • अफलत वर्षों में आम की उत्पादकता बढ़ाने हेतु पैक्लोब्यूट्राजाल (वृद्धि नियंत्रक) का कृषक उद्यानों में प्रयोग।
  • वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता हेतु वरसीम, मीठी ज्वार, चुकंदर एवं बहुवर्षीय चारा घासों का कृषक प्रक्षेत्र पर प्रदर्शन।
  • अधिक दुग्ध उत्पादन हेतु पशुओं में समेकित पोषण प्रबंधन।
  • पोषक वाटिका का कृषक प्रक्षेत्र पर प्रदर्शन।